राजस्थान में कृषि

राजस्थान में कृषि

राजस्थान में कृषि

राजस्थान में कृषि राजस्थान राज्य का कुल क्षेत्रफल 3 लाख 42 हजार 2 सौ 39 वर्ग किलोमीटर है। जो की पूरे देश का 10.41 प्रतिशत है। राजस्थान में देश का 11 प्रतिशत क्षेत्र कृषि योग्य भूमि मौजूद है और राज्य में केवल 50 प्रतिशत सकल सिंचित उपलब्ध क्षेत्र है जबकि 30 प्रतिशत शुद्ध सिंचित उपलब्ध क्षेत्र है।

राजस्थान राज्य का 60 % क्षेत्र मरूस्थल और 10 प्रतिशत क्षेत्र पर्वतीय प्रकृति के है। अतः यहां पर कृषि कार्य संपन्न नहीं हो पाता है और मरूस्थलीय भूमि में सिंचाई के उपयुक्त साधनों का अभाव पाया जाता है। अधिकांश खेती राज्य में बारिश पर निर्भर होने के कारण राज्य में कृषि को मानसून का जुआ भी कहते है। Rajasthan Agriculture ( राजस्थान में कृषि )

राजस्थान में कृषि

* राजस्थान में भू उपयोग व कृषि जोतो का आकार ( Land use and agricultural land size in Rajasthan ):-

भू-उपयोग सांख्यिकी (वर्ष 2013-14) में राज्य का प्रतिवेदित भौगोलिक क्षेत्रफल – 342.68 लाख हैक्टेयर मापा गया है।

जिसमें शुद्ध बोया गया क्षेत्रफल – 53.31 प्रतिशत ( 182.68 लाख हैक्टेयर ) मौजूद है।

राजस्थान में 2010-11 में कृषि जौतो का औसत आकार 3.07 हेक्टेयर जबकि अखिल भारतीय स्तर पर कृषि जोत का औसत आकार 1.15 हेक्टेयर मौजूद था।

भारत देश में कृषि जोत के आकार के आधार पर राजस्थान का क्रमशः नागालैंड, पंजाब व अरुणाचल प्रदेश के बाद चौथे स्थान पर आता है। संपूर्ण देश में क्रियाशील जोतों का आकार घटने की प्रवृत्ति मौजूद है।

कृषि के प्रकार ( Types of agriculture ):-

1.- शुष्क कृषि ( Dry farming ):- ऐसी कृषि पद्धति जो रेगिस्तानी भागों में जहां सिचाई का अभाव हो वहां पर शुष्क कृषि की जाती है। इसमें भूमि मेे नमी का संरक्षण किया जाता है व कृषि की जाती है।

फ्वारा पद्धति  ( Spray system )

ड्रिप सिस्टम ( Drip system )

इजराइल देश के सहयोग से मुख्यत शुष्क कृषि में इसका उपयोग किया जाता है।

2.- सिचित कृषि ( Irrigated farming ) :– जहां पर सिचाई के साधन पूर्णतया रूप से उपलब्ध है। यहां पर उन फसलों को बोया जाता है जिन फसलों को पानी की अधिक आवश्यकता होती है।

3.- मिश्रित कृषि ( Mixed agriculture ) :–  जब कृषि करने के साथ-साथ पशुपालन को भी साथ में  किया जाता है तो उसे मिश्रित कृषि कहते है।

4.- मिश्रित खेती ( Mixed farming ):-  जब दो या दो से अधिक फसले एक साथ मिश्रित रूप से बोई जाये तो उसे मिश्रित खेती कहा जाता है।

5.- झूमिग कृषि ( Zooming agriculture ) :– इस पद्धति की कृषि में सूखे वृक्षों को जलाकर उसकी राख को एक खाद के रूप में प्रयोग किया जाता है। राजस्थान में इस प्रकार की खेती को वालरा कहते है।  जनजाति द्वारा पहाडी क्षेत्रों में इसे “चिमाता” व मैदानी में “दजिया” भी कहते है। इस पद्धति की खेती से पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान भी पहुंचता है। राजस्थान में उदयपुर, डूंगरपुर, बांरा जिलों में वालरा कृषि की जाती है।

फसले ( The croभीलp):-

खाद्यान्न फसले ( 57 % )

नकदी/व्यापारिक फसले (43 %)

गेहूं, जो, ज्वार, मक्का, गन्ना, कपास, तम्बाकू, बाजरा, चावंल, दहलने, तिलहन, सरसों, राई, मोड, अरहर, उड्द, तारामिरा, अरण्डी, मूंग, मसूर, चांवल, तिल, सोयाबीन,  इत्यादि उत्पादित की जाती है।

रबी की फसल ( Rabi crop ):-

इसी राजस्थान में सर्दी को स्यालू और गरमी को उनालू का मौसम कहा जाता है इस का प्रारंभ नवंबर में होता है तथा मार्च सन तक चलता है| इन फसलों को अक्टूबर नवम्बर में बोया व मार्च अप्रैल में काटा जाता है।
रवि की मुख्य फसलें- गेहूं, जो, चना, मसूर, मटर, सरसों, अलसी, तारामीरा, सूरजमुखी, धनिया, जीरा, मेथी राजस्थान में बोई जाती है।

खरीफ की फसल ( Kharif crop ):-

जून, जुलाई में बोई जाती है तथा सितम्बर-अक्टूबर में काटा जाता है।
खरीफ का मौसम किसी राजस्थान में चौमासा एवं स्यालु/सावणु के नाम से भी जाता है यह मौसम की फसल जुलाई से प्रारंभ होकर अक्टूबर के अंत तक चलता है|
खरीफ की मुख्य फसलें चावल ज्वार बाजरा मक्का अरहर उड़द मूंग चावला मोठ मूंगफली अरंडी तेल सोयाबीन कपास गन्ना ग्वार आदि प्रमुख बोई जाती है।

जायद की फसल ( Zayed crop ):-

जायद की फसल का प्रारंभ अप्रैल प्रारंभ से होता है तथा जून अंत तक चलता है

मार्च-अपे्रल व जून-जुलाई इसकी अवधि है।

जायद – खरबूजे, तरबूज ककडी की फसल बोई जाती है।

* खाद्यान्न फसले ( Food crops ):-

1.- गेहूं ( Wheat):-

राजस्थान में सबसे अधिक खाया जाने वाला और सबसे अधिक उत्पन्न होने वाला खाद्यान्न गेंहू है। देश में गेहूं का सर्वाधिक उत्पादक राज्य उत्तर-प्रदेश है। राजस्थान का गेहूं के उत्पादन में देश में चौथा स्थान है।

राजस्थान का पूर्वी भाग गेहूं धान के उत्पादन में हमेशा अग्रणी स्थान रखता है। जबकि श्रीगंगानगर जिला राज्य में गेंहू उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। गेंहू के अत्यधिक उत्पादन के कारण गंगानगर जिले को राजस्थान राज्य का अन्न भंण्डार और कमाऊपूत भी कहलाता है। राजस्थान राज्य में गेहूं की प्रमुख किस्में सोना-कल्याण, सोनेरा, शरबती, कोहिनूर, और मैक्सिन प्रमुख रूप से बोयी जाती है।

2.- जौ ( Barley ):-

देश में जौ का सबसे अधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश राज्य में होता है। यू.पी. के पश्चात् राजस्थान जौ की फसल के उत्पादन में दूसरे स्थान पर मौजूद है। राजस्थान के पूर्वी क्षेत्र में जौ सर्वाधिक उत्पादित होता है और जयपुर जिला जौ की फसल के उत्पादन में राज्य का प्रथम स्थान पर काबिज है। राजस्थान राज्य में जौ कि प्रमुख किस्मों में ज्योति राजकिरण और आर.एस.-6 प्रमुख रूप से बोई जाती है। जौ माल्ट बनाने में  उपयुक्त है।

3.- ज्वार ( Sorghum ):-

(सोरगम / गरीब की रोटी  से उपनामित है।
ज्वार को खाद्यान्न के रूप में भी प्रयोग में लाया  जाता है। देश में सर्वाधिक ज्वार महाराष्ट्र राज्य में उत्पादित होता है। जबकि राजस्थान ज्वार के उत्पादन में में देश में चैथा स्थान रखता है। राजस्थान में मध्य भाग में ज्वार का सर्वाधिक उत्पादन किया जाता है। जबकि अजमेर जिला ज्वार उत्पादन में प्रथम स्थान पर काबिज है। ज्वार की राज्य में प्रमुख किस्म पी.वी.-96 प्रमुख रूप से है।

राजस्थान में ज्वार अनुसंधान केन्द्र वल्लभनगर उदयपुर में स्थापित किया गया है जहा पर ज्वार की नई किस्में अनुसंधानिक की जाती है।।

4.- मक्का ( Maize ):-

दक्षिणी राजस्थान का प्रमुख खाद्यान्न की फसल मक्का है। देश में सर्वाधिक मक्का का उत्पादन उत्तर प्रदेश राज्य में उत्पादित किया जाता है। जबकि राजस्थान का मक्का के उत्पादन मे देश में आठवां  स्थान मिला है। राजस्थान का चित्तौडगढ़ जिला मक्का उत्पादन में राज्य भर प्रथम स्थान पर मौजूद है। राजस्थान में मक्के की डब्ल्यू -126 किस्म मुख्य रूप से बोई जाती है जबकि कृषि अनुसंधान केन्द्र बांसवाडा द्वारा मक्का की माही कंचन व माही घवल हिब्रिड किस्म प्रमुख रूप से तैयार की गई है।

5.- चांवल ( Rice ):-

देश में सबसे अधिक खाया जाने वाला अन्न चावंल है। भारत में इसका सर्वाधिक उत्पादन पश्चिमी बंगाल में होता है। राजस्थान में चावंल खाध्यान का उत्पादन बस नाममात्र का आधा प्रतिशत से भी कम है। राजस्थान राज्य में हुनमानगढ़ जिले के घग्घर नदी बहाव क्षेत्र (नाली बैल्ट) में “गरडा वासमती” नामक चावंल की फसल उत्पन्न किया जाता है। जबकि कृषि अनुसंधान केन्द्र बासवांडा ने चावंल की हिब्रिद माही सुगंधा किस्म विकसित की है।

चावल के लिए 20 से 25 डिग्री सेल्सीयस तापमान व 200 सेमी वार्षिक वर्षा की अति आवश्यकता होती है। जो कि राजस्थान जैसे मरुस्थलीय प्रदेश में उपलब्ध नहीं है। अतः यहां जापानी पद्वति से चावल का उत्पादन किया जाता है। देश में प्रति हैक्टेयर सर्वाधिक उत्पादन में पंजाब राज्य देश में प्रथम स्थान रखता है।

6.- चना ( Gram ):-

यह एक उष्णकटिबधिय दलहन प्रकृति का पौधा है। इसके लिए मुख्यत रेगी मिट्टी की आवश्यकता होती है। देश में उत्तर-प्रदेश के बाद राजस्थान चना फसल के उत्पादन में दूसरे स्थान पर है। राजस्थान में चुरू जिला चने के सर्वाधिक उत्पादन में प्रथम स्थान पर काबिज है। गेहूं और जो के साथ चने को बोने पर उसे गोचनी या बेझड़ कहते है।

7.- दलहन ( Pulses ):-

चने के बाद विभिन्न प्रकार की दालो में मोठ की फसल का प्रथम स्थान राजस्थान का पश्चिमी भाग दालों में अग्रणी स्थान रखता है। राजस्थान का नागौर जिला दलहन उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान में कुल कृषि भूमि के 18 प्रतिशत क्षेत्रफल पर दाले बोयी जाती है। उरद की दाल भूमि की उर्वरा शक्ति को वृदित करने में सहायक है। जो पौधों को नाइट्रोजन नाइट्रेट उर्वरक के रूप में प्राप्त होती है। जबकि राइजोबियम नामक बैक्टीरिया नाइट्रोजन को नाइट्रेट और उर्वरक के रूप में परिवर्तित करता है।

8.- बाजरा ( Millet ):-

देश में सबसे अधिक बाजरे का उत्पादन राजस्थान में होता है। राजस्थान में सबसे अधिक बोया जाने वाला खाद्यान्न बाजरा है। राजस्थान का पश्चिमी भाग बाजरा उत्पादन हेतु विश्व भर में प्रसिद्ध है जबकि जयपुर जिला बाजरा उत्पादन में प्रथम स्थान पर काबिज हैं राजस्थान में बाजरे की साधारण किस्मों के अतिरिक्त Raj-171 प्रमुख बिजाई हेतु उपलब्ध किस्म है। राजस्थान के पूर्वी भाग में संकर हीब्रिड बाजरा उत्पादित होता है। उसे सिंचाई की सामान्य बाजरे से अधिक आवश्यकता होती है। राजस्थान में बाजरा अनुसंधान केन्द्र बाडमेर जिले में स्थित है।

नगदी/व्यापारिक फसले ( Cash / trading crops ):-

9.- गन्ना ( Sugarcane ):-

भारतीय मूल का रसदार पौधा (Indian Origine) है। अर्थात् विश्व भर में सर्वप्रथम गन्ने का उत्पादन भारत में ही हुआ माना जाता है। दक्षिणी भारत में सर्वप्रथम गन्ने की खेती प्रारम्भ हुई थी। वर्तमान समय में विश्व भर में गन्ने का सबसे अधिक उत्पादन भारत में ही होता है।

भारत में उत्तर प्रदेश राज्य गन्ना फसल के उत्पादन में प्रथम स्थान पर है (देश का 40 प्रतिशत उत्पादन)। राजस्थान राज्य में गन्ने का उत्पादन सिर्फ नाम मात्र का होता है ( केवल 0.5 प्रतिशत)। राजस्थान में गंगानगर जिला गन्ना फसल के उत्पादन में राज्य में अग्रणी स्थान रखता है। गन्ने का बेहद कम उत्पादन होने के कारण राजस्थान में मात्र तीन सुगर मिले स्थित है|

दा मेवाड शुगर मिल- भूपाल सागर (चित्तौड़) में स्थित है। 1932 निजी मिल

गंगानगर शुगर मिल – गंगानगर में स्थित है (1937 निजी -1956 में सार्वजनिक मिल)

द केशोरायपाटन शुगर मिल – केशोरायपाटन  (बूंदी) में स्थित है। 1965 सहकारी

* 10. कपास ( Cotton ):-

कपास, देशी कपास,अमेरिकन कपास,मानवी कपास, की मुख्य किस्में राजस्थान में बोई जाती है। गंगानगर, कोटा (हडौती क्षेत्र), उदयपुर, हनुमानगढ़, बूंदी, चित्तौडगढ़, बांसवाडा, बांरा क्षेत्र में मुख्यत बोई जाती है।

कपास एक भारतीय मूल का पौधा है। विश्व में सर्वप्रथम कपास का उत्पादन सिंधु घाटी सभ्यता के समय में में हुआ। वर्तमान समय में विश्व में सर्वाधिक कपास भारत में उत्पादित होती है। जबकी भारत देश में गुजरात राज्य कपास के उत्पादन में में प्रथम स्थान रखता है। राजस्थान देश में चतुर्थ स्थान पर है। राजस्थान राज्य में कपास तीन प्रकार की होती है।

वर्तमान समय में राजस्थान का हनुमानगढ़ जिला कपास उत्पादन में राजस्थान में अग्रणी स्थान रखता है। जबकि जैसलमेर व चरू जिलों में कपास का उत्पादन बस नाम मात्र का होता है। कपास को “बणीया” भी कहते है। कपास से बिनौला (कपास के बीज) निकाला जाता है उससे खल व वनस्पति घी बनाई जाती है। कपास की एक गांठ का वजन 170 किलो होता है।

11.- तम्बाकू ( Tobacco ):-

भारतीय मूल का पौधा यह नही है। पूर्तगाली 1508 ईसवी में इसको सर्वप्रथम भारत में लेकर आये थे। मुगल शासक जहांगीर ने सर्वप्रथम भारत में सन 1608 ईसवी में इसकी खेती की शुरूआत की किन्तु कुछ समय के बाद इसके जब ग्लत परिणाम आने लगे तब जहांगीर ने इसकी कृषि ही  बंद करवा दिया।

वर्तमान समय में भारत का आंधप्रदेश राज्य तम्बाकू के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान राज्य में पूर्व के भाग में तम्बाकू का सर्वाधिक उत्पादन किया जाता है। अलवर जिला राजस्थान में तम्बाकू के उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान में मुख्यत तम्बाकू की दो किस्में बोयी जाती है।

निकोटिना टेबुकम  ( Nikotina Tekinum ) और

निकोटिना रास्टिका ( Nikotina Rastica ) बोई जाती है।

12.- तिलहन ( Oilseed ):-

( तिलहन विकास कार्यक्रम 1984-85 में संचालित किया गया था )

सरसो, राई, तारामीरा, तिल, मूंगफली, अरण्डी, सोयाबीन, होहोबा राजस्थान राज्य में उत्पन्न होने वाली मुख्य तिलहन फसले है। तिलहन के उत्पादन में राजस्थान का देश में तीसरा स्थान है। तिलहन के उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम है। किन्तु सरसों व राई के उत्पादन में राजस्थान देश में प्रथम स्थान रखता है।

* सरसों ( Mustard ):-

राजस्थान का भरतपुर जिला सरसों के सर्वाधिक उत्पादन में राज्य में प्रथम स्थान पर काबिज है। केन्द्रीय सरसों अनुसंधान केन्द्र सेवर भरतपुर की स्थापना वर्ष1983 में की गयी थी।

* मूंगफली ( Peanut ):-

विश्व भर में मूंगफली का सबसे अधिक उत्पादन भारत में ही होता है। भारत में गुजरात राज्य मूंगफली उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। राजस्थान राज्य का देश में मूंगफली के उत्पादन में चौथे स्थान पर मौजूद है। राज्य में जयपुर जिला मूंगफली के उत्पादन में राजस्थान में प्रथम स्थान रखता है। बीकानेर का लूणकरणसर तहसील क्षेत्र उत्तम प्रकार की मूंगफली के लिए प्रसिद्ध है अतः इसी कारण इस राजस्थान का राजकोट भी कहते है।

* तिल, सोयाबीन, अरण्डी:-

राजस्थान राज्य में तिल पाली जिले में अरण्डी जालौर जिले में, सोयाबीन झालावाड़ में सर्वाधिक उत्पन्न होती है। सोयाबीन राजस्थान राज्य के दक्षिणी-पूर्वी भाग (हडौती) में सर्वाधिक उत्पादित होती है। इसमें सर्वाधिक प्रोटीन की मात्रा होती है। भारत में सर्वाधिक सोयाबीन मध्यप्रदेश में उत्पादित होता है।

* हो होबा (जोजोबा):-

यह एक प्रकार का तिलहन प्रकृति की फसल है इसे भारत में इजराइल देश से मगाया गया। इसका जन्म स्थान एरिजोना का मरूस्थल को माना जाता है। भारत में इसकी खेती की शुरूआत सर्वप्रथम सी.ए.जे.आर.आई संस्थान जोधपुर के द्वारा की गयी। इसकी खेती उस क्षेत्रों में की जाती है जहां सिचाई के साधनों का अधिक अभाव पाया जाता है। इसके तेल का उपयोग मुख्यत सौन्दर्य प्रसाधनों, बडी-बड़ी मशीनरियो व हवाई जहाजों में लुब्रिकेण्टस सिस्टम के रूप में किया जाता है।

राजस्थान में होहोबा के तीन फार्म स्थित है –

ढण्ड (जयपुर) में है

फतेहपुर (सीकर) सहकारी में है

बीकानेर (नीजी) में है।

* गुलाब :– राजस्थान में सबसे अधिक गुलाब का उत्पादन पुष्कर क्षेत्र (अजमेर) में होता है। वहां का ROSE INDIA गुलाब देश भर में अत्यधिक प्रसिद्ध है। राजस्थान राज्य में चेती या दशमक गुलाब की खेती खमनौगर क्षेत्र (राजसमंद) में होती है।

* रतनजोत:- सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाडा में अत्यधिक उत्पादन होता है।

* अफीम:- चित्तौडगढ़, कोटा, झालावाड में सर्वाधिक उत्पादन होता है।

* सोयाबीन :– झालावाड़, कोटा, बांरा क्षेत्र में सर्वाधिक उत्पादन होता है।

* मसाला उत्पादन:-

सम्पूर्ण विश्व में मसाला के उत्पादन में भारत प्रथम स्थान रखता है। भारत में राजस्थान राज्य मसालों के उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। किन्तु गरम मसालों के उत्पादन के लिए केरल राज्य देश में प्रथम स्थान पर है। केरल को भारत का स्पाइस पार्क भी कहते है। राजस्थान में दक्षिण-पूर्व का बांरा जिला राज्य में मसाला उत्पादन में प्रथम स्थान पर काबिज है। राजस्थान का प्रथम मसाला पार्क -झालावाड़ में स्थित है।

सर्वाधिक उत्पादक जिला:-

मिर्च – जोधुपर में सर्वाधिक उत्पादित की जाती है।

धनियां – बांरा में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

सोंफ:- कोटा में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

जिरा, इसबगोल:- जालौर में सर्वाधिक उत्पादित की जाती हैं।

हल्दी, अदरक:- उदयपुर में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

मैथी:- नागौर में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

लहसून:- चित्तौड़गढ़ में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

* फलों का सर्वाधिक उत्पादक जिला ( Most productive district of fruit ):-

अंगूर, कीन्नू ,माल्टा ,मौसमी :- श्री गंगानगर जिले में सर्वाधिक उत्पादित किए जाते हैं।

संतरा:- झालावाड़ ( राजस्थान का नागपुर ) में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

चीकू:- सिरोही में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

सेब:- माउन्ट आबू (सिरोही) में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

नींबू:- धौलपुर में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

आम:- भरतपुर में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

केला:- बांसवाडा में सर्वाधिक उत्पादित की जाता है।

नाशपति:- जयपुर में सर्वाधिक उत्पादित की जाती है।

मतीरा ,:- टोंक/बीकानेर जिले में सर्वाधिक उत्पादित किए जाते हैं।

पपीता/खरबूजा:- टोंक जिले में सर्वाधिक उत्पादित किया जाता है।

* राजस्थान की मंडिया ( Rajasthan’s mandia ):-

जीरा मंडी:- मेडता सिटी (नागौर) में स्थित है।

सतरा मंडी:- भवानी मंडी (झालावाड) में स्थित है।

कीन्नू व माल्टा मंडी:- गंगानगर में स्थित है।

प्याज मंडी:- अलवर में स्थित है।

अमरूद मंडी:- सवाई माधोपुर में स्थित है।

ईसबगोल (घोडाजीरा) मंडी:- भीनमाल (जालौर) में स्थित है।

मूंगफली मंडी:- बीकानेर में स्थित है।

धनिया मंडी:- रामगंज (कोटा) में स्थित है।

फूल मंडी:- अजमेर में स्थित है।

मेहंदी मंडी:- सोजत (पाली) में स्थित है।

लहसून मंडी:- छीपा बाडौद (बांरा) में स्थित है।

अश्वगंधा मंडी:- झालरापाटन (झालावाड) में स्थित है।

टमाटर मंडी:- बस्सी (जयपुर) में स्थित है।

मिर्च मंडी:- टोंक में स्थित है।

मटर (बसेडी):- बसेड़ी (जयपुर) में स्थित है।

टिण्डा मंडी:- शाहपुरा (जयपुर) में स्थित है।

सोनामुखी मंडी:- सोजत (पाली) में स्थित है।

आंवला मंडी:- चोमू (जयपुर) में स्थित है।

राजस्थान राज्य में प्रथम निजी क्षेत्र की कृषि मण्डी कैथून (कोटा) में ऑस्ट्रेलिया की ए.डब्लू.पी. कंपनी द्वारा स्थापित की गई है।

* कृषि से संबंधित योजनाऐं ( Agriculture related schemes ):-

1.- भागीरथ योजना ( Bhagirath Yojana ):- कृषि से संबंधित इस योजना के अन्तर्गत किसान स्वयं ही खेती में ऐसे लक्ष्य निर्धारित करता है। जो कठिन व मुश्किल होता हैं और उन लक्ष्यों को प्राप्त करने में कुशलता के साथ प्रयत्न भी करते है। इसके लिए जयपुर में विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है।

2.- निर्मल ग्राम योजना ( Nirmal Gram Yojana ) :– गांवो में कचरे का उपयोग कर कम्पोस खाद तैयार करने हेतु शुरू की गई योजना है।

* कृषि विकास हेतु संस्थाएं एवं योजनाएं ( Institutions and Schemes for Agriculture Development ) :-

राजस्थान राज्य भंडारण निगम कब स्थापना की गई थी– 30 दिसंबर, 1957 को।

राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड(NEFED), नई दिल्ली की स्थापना कब हुई- 2 अक्टूबर, 1958 को।

भारत के खाद्य निगम की स्थापना कब की गई – 1964 में।

किसानों को उच्च गुणवत्ता वाले उर्वरक समुचित व समयानुसार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इफ्को की स्थापना कब की गई –  3 नवंबर, 1967 को।

कृषिगत वित्त निगम की स्थापना कब की गई –  अप्रैल, 1968 में।

राज्य कृषि उद्योग निगम की स्थापना कब की गई – 1969 में।

राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड की स्थापना कब की गई – 6 जून, 1976 को।

फतेहपुर (राजस्थान) में प्रथम कृषि विज्ञान केंद्र की स्थापना कब की गई – 1976 में।

राजस्थान राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था की स्थापना कब की गई – 30 दिसंबर, 1977 को।

राजस्थान राज्य बीज निगम की स्थापना कब की गई – 28 मार्च, 1978 को।

कृषि विपणन निदेशालय की स्थापना कब की गई –  1980 में।

कृभको की स्थापना कब की गई – 17 अप्रैल, 1980 को।

राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) की स्थापना कब की गई –  12 जुलाई,1982 को।

किसान सेवा केंद्र सादरी द्वारा जोधपुर में  की गई –  1998 में।

राजस्थान कृषि के महत्वपूर्ण फैक्ट्स:-

श्री गंगानगर जिले से राज्य को अधिकतम भोजन की ऊर्जा कैलोरी प्राप्त होती है।

केंद्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र दुर्गापुरा जयपुर में स्थापित है।

काजरी संस्थान जोधपुर में स्थापित है जिसका गठन 1959 में किया गया था।

गंगानगर जिले को राजस्थान का अन्न भंडार के नाम से भी जाना जाता है।

राजस्थान राज्य में दहशत गुलाब चैती गुलाब अर्थात देसी गुलाब की खेती पुष्कर अजमेर में मुख्यत की जाती है।

केंद्रीय सरसों अनुसंधान केंद्र राज्य में सेवर भरतपुर में 20 अक्टूबर 1993 को निर्मित किया गया था।

राज्य में चुकंदर से चीनी बनाने का एकमात्र कारखाना श्रीगंगानगर में स्थापित है।

राजस्थान राज्य सहकारी तिलहन उत्पादक संघ लिमिटेड तिलम संघ की स्थापना वर्ष 1990 में हुई।

डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर आदि जिलों में झूमिंग प्रणाली की वालरा खेती की जाती है।

इजराइल की सहायता से राजस्थान के शुष्क प्रदेशों में होहोबा जोजोबा की फसलमुख्यत बोई जाती है।

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राजस्थान में कृषि

राजस्थान में कृषि के महत्वपूर्ण क्वेश्चन जो कम्पटीशन एग्जाम से महत्वपूर्ण सवाल है अभी Quiz 👇 को स्टार्ट करे

1 / 10

वर्तमान में राजस्थान बीजीय मसालों के संदर्भ में भारत में कौन सा स्थान रखता है ?

2 / 10

सतत कृषि के संदर्भ में कौन सा कथन सही नही है ?

3 / 10

राष्ट्रीय बीजीय मसाला अनुसंधान केंद्र कहां पर स्थित है ?

4 / 10

पीली क्रांति का सम्बन्ध है ?

5 / 10

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नैम)योजना की स्थापना किस महापुरुष की जयंती पर की गई है?

6 / 10

सुमेलित कीजिए-

संस्थान का नाम स्थान
(A) NDRI (1) इंदौर (MP)
(B) NRCG (1)भरतपुर(राजस्थान)
(C) NRCRM (3) जूनागढ़(गुजरात)
(D) NRCS (4) करनाल(हरियाणा)

7 / 10

खरीफ की फसल किस माह में बोई जाती है-

8 / 10

रैंचिग कृषि निम्न में से किस देश में नहीं की जाती हैं –

9 / 10

किस प्रकार की कृषि में पशुपालन व फसल उत्पादन एक- दूसरे पर पूर्णतया निर्भर रहते है –

10 / 10

विशिष्ट कृषि जातों में कुल आय का कितना % किसी एक उधम अथवा फसल से प्राप्त होता है-

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