राजस्थान की जलवायु

राजस्थान की जलवायु

राजस्थान की जलवायु

राजस्थान की जलवायु वैसे तो राजस्थान में अधिकांश मरुस्थलीय प्रदेश होन के कारण जलवायु मौसम के अनुसार परिवर्तित होती रहती है तो आइए जानते हैं इस पोस्ट में विस्तार से राजस्थान की जलवायु के बारे में।

राजस्थान की जलवायु

राजस्थान की जलवायु:-

किसी भू-भाग पर लंबे समय के दौरान विभिन्न समयों में विविध मौसमों की औसत अवस्था प्रकृति को उस भू-भाग की जलवायु कहा जाता है।

मौसम से आशय है कि मुख्यतया छोटी अवधि जैसे एक दिन, एक सप्ताह , समय की इकाई दिनों में। जबकि जलवायु एक लम्बी समय अवधि के दौरान किए गए अनुवीक्षणों के द्वारा निर्धारित दशाओं के औसत के साथ संबंध रखता है। जलवायु के पूर्णत अध्ययन में कई तत्त्व जैसे तापक्रम, दबाव, आर्द्रता, वर्षा, वायुवेग, धूप की अवधि और कई अन्य तत्वों को मुख्यत शामिल  किया जाता है।

राजस्थान राज्य की जलवायु को नियंत्रित करने वाले कारकों में अक्षांशीय स्थिति, पानी से सापेक्षित स्थिति, पर्वतीय अवरोध, ऊँचाई, प्रचलित हवाएं तथा महाद्वीपता आदि मुख्य महत्त्वपूर्ण कारक हैं। राजस्थान राज्य की जलवायु का पूर्णत सफल अध्ययन करने से पूर्व निम्नलिखित तथ्यों को ध्यान में रखना अतिआवश्यक है:-

1. राजस्थान की विद्यमान स्थिति 2303’ डिग्री व 30012’ उत्तरी अक्षांशों में विस्तारित है। इन्हीं अक्षांशों में उत्तरी अरेबिया, साइबेरिया और मिश्र  (इजिप्ट) देश, का कुछ भाग, उत्तरी सहारा और मैक्सिको के भाग स्मिलित हैं। जहां जलवायु की दशायें राजस्थान राज्य की अपेक्षा बेहद अधिक कठोर और प्रचण्ड रूपीत है। भारत देश के उत्तरप्रदेश व पश्चिमी बंगाल राज्य के अधिकांश भाग भी इन्हीं अक्षांशों के बीच मौजूद है।

2.- राजस्थान राज्य के दक्षिणी भाग, कच्छ की खाङी से लगभग 225 किलोमीटर और अरब सागर से लगभग 400 किलोमीटर दूर स्थित है।

3. – राजस्थान राज्य के अधिकांश भाग समुद्रतल से 370 मीटर से भी कम ऊंचाई पर स्थित हैं। हालांकि अरावली पर्वतमाला प्रदेश के कुछ भागों की ऊंचाई 1375 मीटर तक सर्वाधिक पाई जाती है।

4.- राजस्थान राज्य में अरावली पर्वत श्रंखला दक्षिण-पश्चिम से उत्तर-पूर्व में विस्तारित है। राजस्थान राज्य के दक्षिणी भागों से होकर कर्क रेखा गुजरती है।

राजस्थान की जलवायु की विशेषताएँ:-

राजस्थान राज्य की लगभग समस्त वर्षा गर्मियों में (जून के अंत में व जुलाई, अगस्त में) दक्षिणी पश्चिमी मानसूनी हवाओं के चलने से होती है।

शीतकाल में बहुत कम वर्षा होती है उत्तरी पश्चिमी राजस्थान में भूमध्य सागर से उत्पन्न होने वाले पश्चिमी विक्षोभों से होती है, जिसे मावठ भी कहा जाता हैं। राजस्थान में वर्षा का वार्षिक औसत लगभग 58 सेमी है।

राजस्थान में वर्षा की मात्रा व समय अनिश्चित है। वर्षा के अभाव के कारण  आने वाले अकाल व सूखे का प्रकोप बना रहता है।

राजस्थान राज्य में वर्षा का असमान वितरण है। राजस्थान के दक्षिणी-पूर्वी भाग में जहां अधिक वर्षा होती है, वहीं उत्तरी-पश्चिमी भाग में ना के बराबर वर्षा होती है।

जलवायु के आधार पर राजस्थान में मुख्यतः तीन ऋतुएं पाई जाती है:-

(1) ग्रीष्म(गर्मी) ऋतु – मार्च से बीच जून माह तक।

(2) शीत(सर्दी) ऋतु – नवम्बर से फरवरी माह तक।

(3) वर्षा(बारिश) ऋतु – मध्य जून से सितंबर के माह तक।

(1) ग्रीष्म काल ऋतु –

तापमान सूर्य के उत्तरायण में प्रवेश होने के कारण मार्च में तापमान बढ़ने के साथ ही ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है। जून माह में तापमान बढ़ने के साथ ही ग्रीष्म काल ऋतु का आरंभ होता है। जून माह में तापमान उच्चतम सीमा पर होता हैं। इस समय सम्पूर्ण राजस्थान का औसत तापमान लगभग 38 डिग्री सेल्सियस के लगभग होता है। परंतु राजस्थान के पश्चिमी भागों – जैसलमेर, बीकानेर, फलोदी तथा धौलपुर में उच्चतम तापमान 45 डिग्री से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। अरावली पर्वतीय प्रदेश क्षेत्र में ऊंचाई में स्थित होने के कारण अपेक्षाकृत कम तापमान (30 डिग्री सेल्सियस) तक रहता है।

वर्षा एवं पवनें :– बेहद अधिक गर्मी के कारण राजस्थान के उत्तरी व पश्चिमी क्षेत्रों में वर्षा आगे चली जाती है। इसी कारण राजस्थान राज्य के पश्चिमी भाग में औसतन 20 सेंटीमीटर वर्षा होती है। राज्य में सबसे अधिक वर्षा (75 से 100 सेमी वार्षिक) दक्षिणी पूर्वी पठारी भाग क्षेत्र में होती है। राज्य के पूर्वी मैदानी भाग में वर्षा सामान्य औसत 50 से 75 सेमी वर्ष भर में होती है।
अक्टूबर-नवम्बर महीने में राज्य में मानसूनी हवाओं के प्रत्यावर्तन का समय अवधि होता है। सूर्य के दक्षिणायन में प्रवेशित होने के साथ ही तापमान धीरे-धीरे गिरावट आने लगती है एवं इन माहों में राज्य में 20 डिग्री से 30 डिग्री तक तापमान हो जाता है। इस समय अवधि में यहां पर वर्षा भी नहीं होती है।

(2) शीत, शरद ऋतु :–

दिसंबर के महीने में सूर्य दक्षिणी गोलार्द्ध में मकर रेखा पर लम्बवत् रूप में चमकने लगता है। इसके फलस्वरूप उत्तरी गोलार्द्ध में तापमान में अत्यधिक मात्रा में कमी हो जाती है। राजस्थान राज्य के कुछ मरुस्थलीय क्षेत्रों में रात्रि काल का तापमान शून्य या इससे भी कम हो जाता है। इस समय अवधि में दिन के तापमान भी बहुत कम हो जाते हैं। कई बार तापमान के शून्य या शून्य से भी नीचे उतर जाने पर फसलों पर पाला पङ जाने से वे पूरी तरह से नष्ट हो जाती हैं। शरद ऋतु में राजस्थान राज्य में कभी-कभी भूमध्य सागर से उठे पश्चिमी वायु विक्षोभों के कारण यहां पर वर्षा हो जाती है, जिसे मावट कहते हैं।

* यह वर्षा  रबी की फसल के लिए बेहद लाभदायक होती है। इस ऋतु में कई बार उत्तरी भाग से आने वाली बेहद ठण्डी हवाएं शीत लहर का प्रकोप डालती हैं। यहां जनवरी महीने में सबसे अधिक सर्दी पङती है। निम्न वायुदाब होने के कारण का केन्द्र उत्पन्न हो जाता है। जिससे यहां धूलभरी आँधियां भी चलती है।

* धरातल के बेहद अधिक गर्म होने एवं बादलरहित आकाश में सूर्य की सीधी किरणों की बेहद अधिक गर्मी के कारण तेज गर्म हवाएं चलती है, जिन्हें यहाँ लू कहते हैं। यहां चलने वाली आँधियों के कारण कहीं-कहीं वर्षा भी हो जाती है।

(3) वर्षा ऋतु :–

*  जून के मध्य के पश्चात राजस्थान में मानसूनी हवाओं के आगमन के साथ ही वर्षा होने लगती है, इसके फलस्वरूप तापमान में कुछ कमी भी हो जाती है परंतु अधिक आर्द्रता के कारण मौसम में उम्स हो जाती है। इस समय राजस्थान राज्य के अधिकांश भागों का सामान्य तापमान 18 डिग्री से 30 डिग्री तक हो जाता है।

* वायु का दबाव बेहद कम होने के कारण हिन्द महासागर के उच्च वायुदाब वाले क्षेत्र से मानसूनी पवनें-बंगाल की खाङी की मानसूनी हवाएं एवं अरब सागरीय मानसूनी हवाएं राज्य में प्रवेश करती हैं जिनसे यहां बारिश होती है। ये मानसूनी हवाएं दक्षिणी-पश्चिमी मानसून हवाएं भी कहलाती है। राजस्थान राज्य की लगभग अधिकांश वर्षा इन्हीं मानसूनी हवाओं से होती हैं।

* यहां पर आने वाली बंगाल की खाङी की मानसूनी हवाएं गंगा-यमुना नदियों के सम्पूर्ण मैदानी इलाकों को पार कर के  यहां पर आती हैं। अतः यहां आते-आते उनकी आर्द्रता बहुत ही कम रह जाती है। इस कारण राजस्थान में वर्षा की बेहद कमी रह जाती है। अरावली पर्वत माला होने के कारण ये राजस्थान राज्य के उत्तर व पश्चिमी भाग में तो वर्षा कर ही नहीं पाती है।

* अरब सागर की मानसूनी हवाएं अरावली पर्वत श्रंखला के समानान्तरण चलने के कारण अवरोधक के अभाव में यहां वर्षा किए बिना ही रह जाती है।

 

राजस्थान को सामान्यतः 5 प्रकार के जलवायु प्रदेशों में विभक्त किया गया है:

1.- शुष्क जलवायु प्रदेश

इस शुष्क जलवायु प्रदेश के अंतर्गत जैसलमेर, बाङमेर जिले के उत्तरी भाग, जोधपुर जिले की फलोदी तहसील का पश्चिमी भाग, बीकानेर जिले का पश्चिमी भाग तथा गंगानगर जिले का दक्षिणी भाग समिलित है। इन क्षेत्रों में शुष्क उष्ण मरुस्थलीय जलवायु की दशाएं पाई जाती हैं। यहां पर वर्षा बहुत ही कम होती है। यहां पर धूल भरी आँधियां, भयंकर गर्मी, लू का प्रकोप शुष्क एवं गर्म हवाएं, वर्षा की कमी, वनस्पति की अत्यधिक कमी एवं आर्द्रता की कमी इस प्रदेश की प्रमुख विशेषताएं हैं।

2.- अर्द्ध शुष्क जलवायु प्रदेश

इस अर्द्ध शुष्क जलवायु  प्रदेश में सीकर एवं झुंझुनूं जिलों के पश्चिमी भाग, श्रीगंगानगर एवं हनुमानगढ़ के उत्तरी भाग, जोधपुर, बाङमेर, जालौर एवं नागौर जिलों के पूर्वी भागो को शामिल किया गया हैं। इस प्रदेश में  औसत तापमान गर्मियों में 32 डिग्री से 36 डिग्री सेंटीग्रेड तथा सर्दियों में 10 डिग्री से 17 डिग्री सेंटीग्रेड तक रहता है तथा वर्षा का वार्षिक औसत 20 से 40 सेंटीमीटर तक रहता है। हल्की वनस्पति, शुष्क हवाएं एवं अर्द्ध मरुस्थलीय वनस्पति यहां की प्रमुख विशेषताएं हैं।

3.- उप आर्द्र जलवायु प्रदेश

इस उप आर्द्र जलवायु प्रदेश के अंतर्गत जयपुर, अजमेर जिले, झुंझुनूं, सीकर, पाली व जालौर जिलों के पूर्वी भाग व दौसा जिला तथा टोंक, भीलवाङा व सिरोही के मुख्यत उत्तरी-पश्चिमी भाग आते हैं। औसत तापमान ग्रीष्म ऋतु में 28 डिग्री सेंटीग्रेड से 34 डिग्री सेंटीग्रेड तथा शीत ऋतु में 12 डिग्री से 18 डिग्री सेंटीग्रेड तक बना रहता है तथा वर्षा 40 से 60 सेंटीमीटर के बीच में होती है।

4.- आर्द्र जलवायु प्रदेश

इस आर्दर जलवायु प्रदेश के अंतर्गत भरतपुर, धौलपुर, दौसा, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली, कोटा, बूंदी व राजसमंद जिले, उदयपुर जिले का उत्तरी-पूर्वी क्षेत्र एवं उत्तरी चित्तौङ जिले का कुछ क्षेत्र स्मिल्लित है। यहां पर औसत तापमान गर्मियों में 32 डिग्री से 34 डिग्री सेंटीग्रेड तथा सर्दियों में 10 डिग्री से 12 डिग्री सेंटीग्रेड तक बना रहता है। यहां वर्षा का वार्षिक औसत 60 से 80 सेंटीमीटर के मध्य है।

5.- अति आर्द्र जलवायु प्रदेश

इस अति आर्द्र जलवायु प्रदेश में दक्षिणी कोटा, बारां, झालावाङ, प्रतापगढ़ डूंगरपुर, बांसवाङा एवं सिरोही जिले का आबू पर्वत खण्ड मुख्यत सम्मिलित है। यहां पर वार्षिक बारिश का औसत 80 से 100 सेंटीमीटर के मध्य तक होती है। औसत तापमान गर्मियों में 28 डिग्री से 32 डिग्री सेंटीग्रेड तथा सर्दियों में 8 डिग्री से 10 डिग्री सेंटीग्रेड तक बना रहता है। यहां पर सदाबहार प्रकृति के वन पाए जाते है

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राजस्थान की जलवायु

राजस्थान की जलवायु के महत्वपूर्ण क्वेश्चन जो कम्पटीशन एग्जाम से महत्वपूर्ण सवाल है अभी Quiz 👇 को स्टार्ट करे

1 / 10

राजस्थान का सर्वाधिक गर्म जिला कौन सा है ?

2 / 10

लू के संदर्भ में कौन सा कथन सही नहीं है ?

3 / 10

राजस्थान में कौन सी जलवायु नहीं पाई जाती ?

4 / 10

कोपेन के जलवायु प्रदेश के वर्गीकरण का आधार क्या था ?

5 / 10

राजस्थान में शीतकालीन वर्षा का कारण है ?

6 / 10

सामान्यत राजस्थान को कितने जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है ?

7 / 10

राजस्थान में औसत वर्षा होती है-

8 / 10

राज्य का आर्द्र जिला है-

9 / 10

मावठ जिस से होती हैं, वह है ?

10 / 10

कोपेन द्वारा प्रस्तुत जलवायु प्रदेशों में कौन सा सुमेलित नहीं है ?

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