राजस्थान में बहु उद्देशीय परियोजनाएं

राजस्थान में बहु उद्देशीय परियोजनाएं

राजस्थान में बहुउद्देशीय परियोजनाएँ

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राजस्थान में बहु उद्देशीय परियोजनाएं

राजस्थान में बहुउद्देशीय परियोजनाएँ निम्न लिखित है-

राजस्थान में पीने के जल हेतु, सिंचाई एवं विद्युत की आपूर्ति हेतु समय समय पर विभिन्न परियोजनाएं कार्यरत हुई। इन परियोजनाओं का प्रमुख लक्ष्य नदियों पर बांध बनाकर वहां से राजस्थान के लोगों को पीने के पानी की आपूर्ति, कृषि की सिंचाई के लिए नहरें एवं विधुत की आपूर्ति के लिए विभिन्न विद्युत सयंत्र लगाए गए।  इस प्रकार की विभिन्न प्रमुख परियोजनाओं का पूर्ण अध्यन हम नीचे के बिंदुओं में करेंगे।

चम्बल नदी घाटी परियोजना:-

चम्बल नदी परियोजना का कार्य वर्ष 1952 -54 में प्रारम्भ हुआ। यह राजस्थान व मध्यप्रदेश दोनों राज्यो की संयुक्त परियोजना है। इसमें दानों राज्यों की हिस्सेदारी 50-50 % है। इस परियोजना के अंतर्गत तीन बाँध, पाँच बिजलीघर और एक बड़ा बैराज़ निर्मित किया गया है।

चंबल नदी पर बने बांध:-

चम्बल नदी परियोजना के अंतर्गत चम्बल नदी पर बांध बनाये गए जो राजस्थान एवं मध्यप्रदेश में जल एवं विद्युत की पूर्ति करते है। इन बांधों से होकर कईं नहरे भी विस्तारित की गयी है जो दोनों राज्यों में कृषि हेतु सिचाई के लिए जल उपलब्ध कराती है।

गांधीसागर बांध:-

यह बांध वर्ष 1960 में मध्यप्रदेश राज्य की भानुपुरा तहसील में स्थापित किया गया है। यह बांध चैरासीगढ़ से 8 किलोमीटर पूर्व एक घाटी में निर्मित हुआ है। गांधीसागर बांध से 2 नहरें भी निकाली गई है

बाईं नहर – यह नहर बुंदी तक जाकर मेेज नदी में मिलती है।
दांयी नहर –यह नहर पार्वत नदी को पार करके मध्यप्रदेश में चलती है यहां पर गांधी सागर विधुत स्टेशन मौजूद भी है।

राणा – प्रताप सागर बांध:-

राणा – प्रताप सागर बांध, गांधीसागर बांध से 48 किलोमीटर आगे चित्तौड़गढ़ में चुलिया जल प्रपात के समीप रावतभाटा नाम के स्थान पर वर्ष 1970 में निर्मित किया गया है।

जवाहर सागर बांध:-

इस बांध को कोटा बांध भी कहते हैं, यह राणा प्रताप सागर बांध से 38 किलोमीटर आगे कोटा के बोरावास गांव में निर्मित किया हुआ है। यहां एक विधुत शक्ति का ग्रह भी बनाया गया है।

कोटा बैराज:-यह बैराज कोटा शहर के पास स्थित  है। इस बैराज से दो नहरें निकलती है।

दायीं नहर :–यह नहर पार्वती व परवन नदी को पार करके मध्यप्रदेश में चल जाती है।
बायी नहर :– यह नहर कोटा, बुंदी, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली क्षेत्र में जलापूर्ति करती है।

भाखड़ा नांगल परियोजना:-

भाखड़ा नांगल परियोजना भारत की सबसे बड़ी व विशाल नदी घाटी परियाजना है। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश राज्यो की संयुक्त परियोजना है। इसमें राजस्थान सरकार का हिस्सा 15.2 प्रतिशत है। हिमाचल प्रदेश का हिस्सा केवल जल विधुत के उत्पादन बिजली में ही है। सर्वप्रथम पंजाब राज्य के गर्वनर लुईस डैन ने सतलज नदी पर बांध बनाने का विचार प जाहिर किया। इस बांध का निर्माण वर्ष1946 में चालू हुआ एवं 1962 को इसे देश को समर्पित कर दिया गया। यह भारत देश का सबसे ऊंचा बांध है। भाखड़ा नांगल बांध के जलाशय का नाम गोबिन्द सागर है। यह जलाशय 518 मीटर लम्बा 9.1 मीटर चौड़ा और 220 मीटर ऊंचा है।

भाखड़ा नांगल परियोजना के अंतर्गत बने बांध:-

भाखड़ा बांध:-

भाखड़ा बांध का निर्माण पंजाब राज्य के होशियारपुर जिले में सतलज नदी पर भाखड़ा नाम की जगह पर किया गया है। इसका जल प्रपात गोविन्द सागर है। इस बांध को देखकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इसे चमत्कारिक विराट वस्तु की संज्ञा दी और बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं को आधुनिक युग के भारत का मन्दिर कहा है।

नांगल बांध:-

नांगल बांध  भाखड़ा बांध से 12 किलोमीटर पूर्व एक घाटी में बना है इससे 64 किलोमीटर लम्बी नहर निकाली गई है जो अन्य नहरों के जल की आपूर्ति करती है।

भाखड़ा मुख्य नहर:+

भाखड़ा मुख्य नहर पंजाब के रोपड़ नामक स्थान से निकलती है यह हरियाणा के हिसार के लोहाणा कस्बे तक प्रवाहित है। इसकी कुल लम्बाई 175 किलोमीटर है।

इसके अलावा इस नहर परियोजना में सरहिन्द नहर, सिरसा नहर, नरवाणा नहर, बिस्त दो आब नहरे प्रवाहित की गई है। इस परियोजना से राजस्थान राज्य के श्री गंगानगर , हनुमानगढ़ व चुरू जिलों को जल, सिंचाई व विधुत एवं श्री गंगानगर, हनुमानगढ़, चुरू, झुझुनू, सीकर बीकानेर को बिजली की आपूर्ति करती है।

व्यास परियोजना:-

यह पंजाब, राजस्थान, हरियाणा राज्य में है। इस परियोजना के पहले चरण में एक बांध, व्यास लिंक को निर्मित और एक विधुत निर्माण ग्रह का निर्माण किया गया है। दूसरे चरण में व्यास नदी पर पौंग डेम बांध बनाया गया है। इससे इंदिरा गाँधी नहर परियोजना ( IGNP) में नियमित रूप से जल की आपूर्ति करने में मदद मिलती है।

रावी – व्यास जल विवाद:-

पानी के बंटवारे के लिए वर्ष 1953 में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, जम्मु – कश्मीर, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश राज्यों के बीच एक मुख्य समझौता हुआ इसमें इन सभी राज्यों के लिए अलग- अलग पानी आपूर्ति की मात्रा निर्धारित की गई लेकिन इसके बावजूद भी यह विवाद ख़तम नहीं हुआ, तब वर्ष 1985 में प्रधानमंत्री राजीव गांधी लौंगवाला समझौते के अन्तर्गत न्यायमूर्ति इराडी की अध्यक्षता में इराडी आयोग को गठित किया गया था। इस आयोग ने राजस्थान राज्य के लिए 86 लाख एकड़ घन फीट पानी आपूर्ति की मात्रा तय की है।

माही – बजाज सागर परियोजना:-

माही – बजाज सागर परियोजना राजस्थान राज्य और गुजरात राज्य की संयुक्त जल परियोजना है। वर्ष 1966 में हुए एक मुख्य समझौता के अनुसार इस परियोजना में  राजस्थान का हिस्सा 45 % व गुजरात का हिस्सा 55 % है। इस परियोजना में गुजरात राज्य के पंच महल जिले में माही नदी पर कड़ाना बांध को निर्मित किया गया है।

इसी परियोजना के अनुसार बांसवाड़ा के बोरखेड़ा गांव में माही बजाज सागर बांध भी बना हुआ है। इसके अलावा यहां दो नहरें, दो विधुत ग्रह, दो लघु विधुत ग्रह व एक कागदी पिक अप बांध भी निर्मित  है। वर्ष 1983 में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने इसमें जल प्रवाहित किया। इस परियोजना से डुंगरपुर व बांसवाड़ा जिलों की कुछ तहसीलों के सिंचाई व पीने की जलापूर्ति होती है।

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना(IGNP):-

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना को  राजस्थान की जीवन रेखा/मरूगंगा भी कहते है। यह परियोजना पूरी होने पर यह परियोजना विश्व की सबसे बड़ी परियोजना होगी। पूर्व में इसका नाम राजस्थान नहर भी था। 2 नवम्बर 1984 को राजस्थान नहर का नाम बदलकर इन्दिरा गांधी नहर परियोजना कर दिया गया। बीकानेर के चीफ इंजीनियर कंवर सैन जी ने वर्ष 1948 में भारत सरकार के समक्ष एक प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जिसका विषय ‘ बीकानेर राज्य में पानी की आवश्यकता‘ था। IGNP का मुख्यालय जयपुर में स्थित है।

इस नहर के निर्माण का प्रमुख उद्देश्य रावी व्यास नदियों के पानी से राजस्थान राज्य को आवंटित 86 लाख एकड़ घन फीट जल परियोजना को उपयोग में लेना है। नहर निर्माण के लिए सर्वप्रथम पंजाब के फिरोजपुर में सतलज, व्यास नदियों के संगम पर वर्ष 1952 में हरिकै बैराज को निर्मित किया गया। हरिकै बैराज क्षेत्र से बाड़मेर जिले के गडरा रोड़ तक नहर बनाने का टारगेट रखा गया। जिससे श्री गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर व बाड़मेर जिले को नियमित जल की आपूर्ति हो सके।

नहर के निर्माण कार्य का शुभारंभ तात्कालिक ग्रहमंत्री श्री गोविन्द वल्लभ पंत ने 31 मार्च 1958 को किया था । 11 अक्टुबर 1961 को इससे राज्य में सिंचाई प्रारम्भ हो गई, जब तात्कालिन उपराष्ट्रपति डा. राधाकृष्णनन ने इस नहर की नौरंगदेसर वितरिका में जल को प्रवाहित किया था।

इन्दिरा गांधी नहर परियोजना के भाग:-

राजस्थान फीडर :- इस नहर का पहला भाग राजस्थान फीडर कहलाता है इस फीडर की लम्बाई 204 किलोमीटर (169 किलोमीटर पंजाब व हरियाणा + 35 किलोमीटर राजस्थान में) है। जो हरिकै बैराज से राजस्थान राज्य के मसितांवली के  हैड तक विस्तारित है। नहर के इस भाग में जल का बिल्कुल दोहन नहीं होता है।

मुख्य नहर :- इंदिरा गांधी नहर परियोजना का द्वितीय भाग  है। इसकी लम्बाई 445 किलोमीटर है। यह हनुमानगढ़ के मसीतावाली से जैसलमेर के मोहनगढ़ कस्बे तक प्रवाहित है। इस प्रकार इंदिरा गांधी नहर परियोजना की कुल लम्बाई 649 किलोमीटर है। इसकी वितरिकाओं की कुल लम्बाई 906 किलोमीटर है। इंदिरा गांधी नहर परियोजना के निर्माण के पहले चरण में राजस्थान फीडर से सूरतगढ़ शाखा, अनुपगढ़ शाखा, पुगल शाखा का निर्माण हुआ है। इसके साथ-साथ 3075 किलोमीटर लम्बी वितरक नहरों का निर्माण हुआ है।

राजस्थान फीडर का निर्माण कार्य वर्ष 1975 में पूर्ण हो गया। नहर निर्माण के दूसरे चरण में 256 किलोमीटर लम्बी मुख्य नहर और 5112 किलोमीटर लम्बी वितरक प्रणाली का टारगेट रखा गया है। नहर का दूसरा चरण बीकानेर जिले के पूगल क्षेत्र के सतासर गांव से आरंभ हुआ था। जैसलमेर जिले के मोहनगढ़ कस्बे में दूसरा चरण पूर्ण हुआ है। इसलिए मोहनगढ़ कस्बे को इंदिरा गांधी नहर परियोजना का ZERO POINT bhi कहते हैं।

मोहनगढ़ क्षेत्र से इसके सिरे से लीलवा व दीघा नामक दो उपशाखाऐं निकाली गयी है। दूसरे चरण का कार्य वर्ष 1972-73 में पूर्ण हुआ है। 256 किलोमीटर लम्बी मुख्य नहर दिसम्बर 1986 में निर्मित होकर तैयार हुई थी। 1 जनवरी 1987 को वी. पी.(विश्व नाथप्रताप) सिंह जी ने इस में जल को प्रवाहित किया।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना नहर की कुल सिंचाई 30 प्रतिशत भाग लिफ्ट नहरों से तथा 70 प्रतिशत शाखाओं के माध्यम से पूर्ण होता है।

रावी – व्यास जल विवाद सुलझाने के लिए गठित इराड़ी आयोग(1966) के फैसले के आधार पर  राजस्थान को प्राप्त कुल 8.6 एम. ए. एफ. जल में से 7.59 एम. ए. एफ. जल का उपयोग इंदिरा गांधी नहर परियोजना के माध्यम से यूज किया जायेगा।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना के द्वारा राज्य के आठ जिलों – हनुमानगढ़, श्री गंगानगर, चूरू, बीकानेर, जोधपुर, नागौर, जैसलमेर एवं बाड़मेर जिलों में जल सिंचाई हो रही है। इनमें से सबसे अधिक ग्रहण क्षेत्र क्रमशः जैसलमेर एवं बीकानेर जिलों का है।

इन्दिरा गांधी नहर से निकली लिफ्ट नहरें:-

गंधेली(नोहर) साहवा लिफ्ट चौधरी कुम्भाराम लिफ्ट नहर हनुमानगढ़, चुरू, झुंझुनू जिलों की जलापूर्ति होती है।

बीकानेर – लुणकरणसर लिफ्ट कंवरसेन लिफ्ट नहर श्री गंगानगर, बीकानेर जिले की जलापूर्ति होती है।

गजनेर लिफ्ट नहर पन्नालाल बारूपाल लिफ्ट नहर बीकानेर, नागौर जिले की जलापूर्ति होती है।

बांगड़सर लिफ्ट नहर भैरूदम चालनी वीर तेजाजी लिफ्ट नहर बीकानेर जिले की जलापूर्ति होती है।

कोलायत लिफ्ट नहर डा. करणी सिंह लिफ्ट नहर बीकानेर, जोधपुर जिले की जलापूर्ति होती है।

फलौदी लिफ्ट नहर गुरू जम्भेश्वर जलो उत्थान योजना जोधपुर, बीकानेर, जैसलमेर जिले की जलापूर्ति होती है।

पोकरण लिफ्ट नहर जयनारायण व्यास लिफ्ट जैसलमेर, जोधपुर जिले की जलापूर्ति होती है।

जोधपुर लिफ्ट नहर(170 किलोमीटर + 30 किलोमीटर तक पाईप लाईन) राजीवगांधी लिफ्ट नहर जोधपुर जिले की जलापूर्ति होती है।

बीकानेर – लुणकरणसर लिफ्ट नहर राजस्थान की सबसे लम्बी बड़ी नहर है।

इन्दिरा गांधी नहर की मुख्य शाखाएं:-

रावतसर(हनुमानगढ़)
यह इंदिरा गांधी नहर परियोजना की पहली शाखा है जो एक मात्र ऐसी शाखा है जो कि नहर के बांयी ओर से निकलती है।

सुरतगढ़ – श्री गंगानगर जिले की इंदिरा गांधी नहर परियोजना की शाखा है।

अनूपगढ़ – श्री गंगानगर में इंदिरा गांधी नहर परियोजना की शाखा है।

पुगल – बीकानेर जिले की इंदिरा गांधी नहर परियोजना की शाखा है।

चारणवाला – बीकानेर जिले की इंदिरा गांधी नहर परियोजना की शाखा है।

दातौर – बीकानेर जिले की इंदिरा गांधी नहर परियोजना की शाखा है।

बिरसलपुर – बीकानेर जिले की इंदिरा गांधी नहर परियोजना की शाखा है।

शहीद बीरबल – जैसलमेर जिले की इंदिरा गांधी नहर परियोजना की शाखा है।

सागरमल गोपा – जैसलमेर जिले में इंदिरा गांधी नहर परियोजना की शाखा है।

इन्दिरा गांधी नहर की उपशाखाएं:-

लीलवा:- यह आईजीएनपी की उप शाखा है।

दीघा – मोहनगढ़ से निकाली गयी उप शाखा हैं।

बरकतुल्ला खां(गडरा रोड उपशाखा़) – सागरमल गोपा शाखा से निकाली गई एक उप शाखा है।

बाबा रामदेव उपशाखा:- आईजीएनपी की उप शाखा है।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना से हनुमानगढ़, श्री गंगानगर, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, नागौर, चुरू, जोधपुर, झुझुनू जिलों को पेयजल की आपूर्ति  हो सकेगा। तथा राजस्थान में 18.36 लाख हैक्टेयर सिंचाई योग्य क्षेत्र उपलब्ध हो सकेगा।

इंदिरा गाँधी नहर परियोजना में पानी के नियमित बहाव चलाव हेतु व्यास – सतलज नदी पर बांध निर्मित किया गया एवं व्यास नदी पर पौंग बांध भी बनाया गया। रावी – व्यास नदियों के द्वीसंगम पर पंजाब के माधोपुर नामक क्षेत्र पर एक लिंक नहर का निर्माण किया गया।

गंधेली साहवा लिफ्ट नहर को जर्मनी के सहयोग से ‘आपणी योजना‘भी बनाई गई है। इस योजना के तहत पहले चरण में हनुमानगढ़, चुरू जिले और इसके दूसरे चरण में चुरू व झुझुनू क्षेत्र के कुछ गांवों में जल की आपूर्ति होगी।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना की सूरतगढ़ व अनूपगढ़ शाखाओं पर तीन लघु विधुत ग्रह भी निर्मित किए गये है। भविष्य में इस नहर को कांडला बन्दरगाह से भी जोड़ने की योजना बनाई जा रही है। जिससे यह परियोजना भारत की राइन नदी बन जाएगी।

डा. सिचेन्द द्वारा आविष्कार की गई लिफ्ट ट्रांसलेटर यंत्र नहर के अन्य स्थानों पर लगा देने से इससे इतनी विधुत उत्पादित की जा सकती है जिससे पूरे उत्तरी – पश्चिमी राजस्थान में नियमित रूप से विधुत की पूर्ति हो सकती है।

गंग नहर:-

गंगनहर भारत की  पहली नहर सिंचाई परियोजना है। कलयुग के भगीरथ के माने जाने वाले बीकानेर के महाराजा गंगासिंह के प्रयासों से गंगनहर के निर्माण द्वारा सतलज नदी का पानी राजस्थान में लाने हेतु 4 दिसम्बर 1920 को बीकानेर, भावलपुर और पंजाब राज्यों की रियासतों के बीच सतलज नदी घाटी समझौता हुआ था।

गंगनहर की आधारशिला फिरोजपुर के हैडबाक्स पर 5 सितम्बर 1921 को महाराजा गंगासिंह जी के द्वारा रखी गई।

26 अक्टूबर 1927 को तत्कालीन वायसराय लार्ड इरविन ने श्री गंगानगर के शिवपुर हैड बाॅक्स पर उद्घाटन किया। यह नहर सतलज नदी से पंजाब के फिरोजपुर जिले के हुसैनीवाला क्षेत्र से निकाली गई है। श्री गंगानगर जिले के संखा गांव में यह राजस्थान राज्य में प्रवेश करती है। शिवपुर, श्रीगंगानगर, जोरावरपुर, पदमपुर, रायसिंह नगर, स्वरूपशहर, होती हुई यह अनूपगढ़ तहसील क्षेत्र तक प्रवाहित होती है।

मुख्य नहर की कुल लम्बाई 129 किलोमीटर है।(112 किलोमीटर पंजाब में + 17 किलोमीटर राजस्थान में) फिरोजपुर क्षेत्र से शिवपुर हैड तक है। नहर की सभी वितरिकाओं की कुल लम्बाई 1280 किलोमीटर है। लक्ष्मीनारायण जी, लालगढ़, करणीजी, समीक्षा इस नहर की मुख्य शाखाएं है। नहर में जल के नियमित बहाव और नहर के मरम्मत के समय इसे गंगनहर लिंक से भी जोड़ा गया है।यह लिंक नहर भी हरियाणा राज्य में लोहागढ़ क्षेत्र से निकाली गई है। और श्रीगंगानगर जिले के साधुवाली गांव में गंगनहर से जोड़ा गया है।

भरतपुर नहर:-

यह नहर परियोजना पश्चिमी यमुना नदी की आगरा नहर से निकाली गई है। भरतपुर के राजा ने सन् 1906 में इस नहर के निर्माण का कार्य शुरू करवाया था। जो सन 1963 – 64 में यह बनकर पूर्ण रूप से तैयार हुई थी। इसकी कुल लम्बाई 28 किलोमीटर(16 किलोमीटर  उत्तर प्रदेश में + 12 किलोमीटर राजस्थान में) है। इस नहर भी भरतपुर में जल की आपूर्ति होती है।

गुड़गांव नहर:-

यह नहर परियोजना हरियाणा व राजस्थान राज्यो की संयुक्त नहर परियोजना है। इस नहर के निर्माण का मुख्य उद्देश्य मानसून के समय में यमुना नदी के अतिरिक्त जल को इन राज्यो में उपयोग लाना है। वर्ष 1966 में इसके निर्माण कार्य की शुरुआत हुआ एवं वर्ष1985 में पूर्ण हो गया। यह नहर परियोजना यमुना नदी में उत्तरप्रदेश के औंखला नामक स्थान  से निकाली गई है। यह नहर परियोजना भरतपुर जिले की कामा तहसील के जुरेरा(जुटेरा) गांव में राजस्थान में प्रवेश करती है। इससे भरतपुर की कामा व डींग तहसील के जल की आपूर्ति होती है। इसकी कुल लम्बाई 58 किलोमीटर है। आजकल इसे यमुना लिंक परियोजना भी कहा जाता  हैं।

भीखाभाई सागवाड़ा माही नहर:-

यह नहर परियोजना डुंगरपुर जिले में हैं इस परियोजना को वर्ष 2002 में केन्द्रीय जल आयोग ने स्वीकृति प्रदान की थी। इसमें माही नदी पर साइफन का निर्माण कर यह नहर परियोजना निकाली गई है। इससे डुंगरपुर जिले में लगभग 21000 हेक्टेयर में सिंचाई व पीने के पानी की आपूर्ति सुविधा उपलब्ध होगी।

जाखम परियोजना:-
यह परियोजना सन 1962 में आरम्भ की गई। यह परियोजना चित्तौड़गढ़ – प्रतापगढ़ मार्ग पर अनुपपुरा गांव में निर्मित हुई है। यह राजस्थान की सबसे ऊंचाई पर स्थित बांध परियोजना है। इस परियोजना से प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, बांसवाड़ा जिले के आदिवासी कृषक लाभान्वित होते हैं। यह परियोजना आदिवासी क्षेत्रों के लिए बेहद लाभदायक सिद्ध हुई है। जल से विधुत उत्पादन की दो इकाईयां यहां पर मौजूद है। सन 1968 में यह शुरू हुई 1986 में इस में प्रथम बार जल प्रवाहित किया गया। यह परियोजना 1997-98 में पूर्ण पूरी हुई है।

सिद्धमुख नहर परियोजना:-

इसका नाम वर्तमान में राजीव गांधी नहर परियोजना कर दिया है इसका शिलान्यास 5 अक्टुबर 1989 को तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने हनुमानगढ़ जिले के भादरा के समीप भिरानी गांव से किया। इस परियोजना का उद्देश्य रावी-व्यास नदियों के अतिरिक्त जल का उपयोग में लेना है, इसके लिए भाखड़ा मुख्य नहर से 275 किलोमीटर लम्बी एक नहर निकाली गयी है।

इस परियोजना को आर्थिक सहायता यूरोपीय आर्थिक समुदाय ने प्रदान कि  है। इससे नोहर, भादरा(हनुमानगढ़), तारानगर, सहवा(चुरू) तहसिलों को जलापूर्ति का लाभ मिल रहा है। इस परियोजना का 12 जुलाई 2002 को श्री मति सोनिया गांधी द्वारा लोकार्पण किया गया। इस परियोजना के लिए जल प्रबन्ध भाखड़ा नांगल हैड वर्क से लाया गया है।

बीसलपुर परियोजना:-

यह जल परियोजना बनास नदी पर टोंक जिले के टोडारायसिंह कस्बे में स्थित है। यह मुख्य रूप से पेयजल की परियोजना है। इसका प्रारम्भ वर्ष 1988-89 में हुआ। यह राजस्थान की सबसे बड़ी पेयजल परियोजना है। इस परियोजना में से दो नहरें भी निकाली गयी है। इससे अजमेर, जयपुर, टोंक में जलापूर्ति की जाती है। इसे NABRD के RIDF से आर्थिक रूप से सहायता प्राप्त होती है।

नर्मदा नहर परियोजना:-

यह गुजरात, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान राज्य की संयुक्त परियोजना है। इस परियोजना में राजस्थान के लिए 0.5 एम. ए. फ.(मिलियन एकड़ फीट) हिस्सेदारी निर्धारित की गई है। इस जल को लेने के लिए गुजरात राज्य के सरदार सरोवर बांध से नर्मदा नहर(458 किलोमीटर गुजरात + 75 किलोमीटर राजस्थान) परियोजना निकाली गई है। यह नहर जालौर जिले की सांचैर तहसील के सीलू गांव में राजस्थान राज्य में प्रवेश करती है। फरवरी 2008 को वसुंधरा राजे ने इस नहर में जल प्रवाहित किया। इस परियोजना में सिंचाई केवल फुव्वरा पद्धति से करने का प्रावधान है जिससे पानी की बचत होती है। इससे जालौर जिला व बाड़मेर की गुढ़ा मलानी तहसील लाभान्वित होती है।

ईसरदा परियोजना:-

बनास नदी पर स्थित यह परियोजना नदी के अतिरिक्त जल को लेने के लिए यह परियोजना सवाई माधोपुर जिले के ईसरदा गांव में बनी हुई है। इससे सवाईमाधोपुर, टोंक, जयपुर की पेयजल की जलापूर्ति होती है।

I  hope you have liked this post Multi purpose projects of Rajasthan. in this post will cover rajasthan ki krishi and chambal pariyojna me kin rajyo ki hissedari hai , people also search rajasthan me kul kitne sinchit jile hai and narmada pariyojna rajasthan , I hope you have cleared your all doubts

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राजस्थान में बहु उद्देशीय परियोजनाएं

राजस्थान में बहु उद्देशीय परियोजनाएं के महत्वपूर्ण क्वेश्चन जो कम्पटीशन एग्जाम से महत्वपूर्ण सवाल है अभी Quiz 👇 को स्टार्ट करे

1 / 10

मेंजा बॉध राजस्थान मे कौनसी नदी पर बनाया गया है ?

2 / 10

निम्न मे से पोंग बॉध राजस्थान मे किस नदी पर बनाया

3 / 10

भाखड़ा नागल परियोजना का हिस्सा राजस्थान मे कितना प्रतिशत है ?

4 / 10

निम्न मे से राजस्थान राज्य मे मिट्टी से बना बॉध कौनसा है ?

5 / 10

पॉचना सिंचाई परियोजना राजस्थान मे कौनसे जिले मे है ?

6 / 10

भारत की सबसे बड़ी नदी घाटी परियोजना कौन सी है ?

7 / 10

निम्न मे से इन्दिरा गॉधी नहर का उद्‌गम स्थल राजस्थान मे कहॉ से है ?

8 / 10

निम्न मे से राजस्थान की इंदिरा गांधी नहर के प्रणेता कौन थे ?

9 / 10

राजस्थान मे कुओ तथा नलकूपो द्वारा कितने प्रतिशत सिंचाई होती है ?

10 / 10

राजस्थान मे नहरो द्वारा सिंचाई कितने प्रतिशत होती है ?

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